मान न मान हम तेरे हैवान। (हिंदी) (اردو) – Hindi & Urdu

February 8, 2026

मान न मान हम तेरे हैवान।

पद्मिनी अरहन्त 

(Hindi & Urdu) 

मान न मान हम तेरे हैवान।

यह संदेश उनकेलिए है।

जो दूसरों की निजी ज़िंदगी में टांग अड़ाना अपना पैदायिश हक समझते हैं।

ख़ासकर दूसरे के बेटे की ब्याह को लेकर ताने मारना, जब यह भेड़िए उस सिलसिले पर कई बार दख़ल अंदाज़ी करके, जान पूछकर समस्या खड़ा करने में कोई कसर नहीं रक्के।वो एक तरफ़,

और दूसरी बात – कोसों मील दूर बैटे किसी अनजान लोगों के बारे में जिनके सात, ना कोई नाता रिश्ता था, ना है, ना कभी होगा, उनसे मूँह लगना इनका रव्वैया और पेशा है, जो अफ़सोस और शर्मनाक है। 

क्योंकि ये लोग अपनी आँगन छोड़, किसी ग़ैर के निजी ज़िंदगी में दख़ल देते हैं, इसलिए इस बकवास को खत्म करने के लिए, इन्हें यह याद दिलाया जाता है, की ये पहले अपनी और गौर करें, ध्यान दे, क्यों की हमेशा किसी अजनबी लोग के बारे में अनाब शनाब बकने से पहले, सबको अपने ग़ैरेबान में झाँके देखना ज़रूरी है।

तभी इंसानियत और तहज़ीब झलकता है।  

ना की अपने घर की गंदगी और नुक्स को देखी अनदेखा और इंकार करके, किसी अनजाने पर वार करना बेमतलब बेवक़ूफ़ी है । 

भारत और पाक़िस्तान दोनों देश में फिलहाल बहुत औरत और मरद जिनकी उम्र ४५ – ६० के करीब है, जिनकी अबतक शादी होने की कोई नाम और निशान नहीं है।

इसलिए इन दख़ल अंदाज़ दलालों को उनकी शादी करवानी चाहिए, अगर दूसरों की शादी को लेकर इन्हें इतनी फ़िक्र है ।

और वैसे भी, यह खुली राज़ है की शादी शुदा एक हसी मज़ाक़ बन गया है इनके समाज में, जहाँ ना शादी क़ायम है, नाही वह शादी शुद्ध है, जहाँ अपने धन दौलत की नुमाईश के लिए शादी रचाया जाता है।

और फिर दहेज़ से लेकर और कई सामाजिक बातों को लेकर, शादी टूटकर रास्ते अलग अलग हो जाते है।

यह हालत भारत और पाकिस्तान में हकीकत है जो लाख चुपाने से भी नहीं चुपती, जैसे सच और मूच नहीं चिपाया जाता।

इसलिए इन मान न मान हम तेरे हैवान को यह आख़िरी बार चेतावनी है की अपने टेडे मरोड़े घर संभालें और बेवजय हमसे मूंह लगकर अपनी नाक न कटवालें। 

रहा सवाल उन कच्छड़ पट्टी का जो ऐसी बातों में उलझते है, और ऐसे फ़िज़ूल बातों की जड़ हैं। अपनी भीभी छोड़े अरसे हुए, और वो भी बिन औलाद जो अपनी चिता पर आग देने के लिए भी नहीं है। इसलिए इस हालत में अपनी सोशियल मीडिया से ही किसी को भाड़े में लाने की मजबूरी है।

उन्हें किसी के जवान बेटे पर तीर मारना और ताने देना सियासी यानी राजनीति गुंडा गर्दी है। जिसकिलिए ये बदनाम है । और उसके मुताबिक इन्हें टोस जवाब लेने की आदत बना लेना ज़रूरी है।

ऐसे मान न मान हम तेरे हैवान की हरकत – अपने मुँह ख़ुद काला करना होता है । 

बतमीज़ी हद पार करने वाले अपने बतमीज़ी पर लगाम दो, वरना मुँह चुपाने को जगह नहीं मिलेगी । 

पद्मिनी अरहन्त 

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ماں نا ماں ہم تیرے حیوان

یاہ سندیش انکیلیے ہے

جو دوسروں کی نجی زندگی میں ٹانگ اڑانا اپنا پیدائش حق سمجھتے ہیں

خسکر دوسری کی بیٹے کی بیاہ کو لیکر طعنے مارما، جب یاہ بھیڑیے اس سلسلے پر کے بار داخل اندازی کرکے، جان پوچھکر سمسیا کھڑا کرنے میں کوئی کسر نہکن رکھے۔ وو ایک طرف،

اور دوسری بات – کوسوں مل دپور بیٹ کسی انجان لوگوں کے بارے میں جنکے سات، نا کو ناتا رشتہ تھا، نا ہے، نا کبھی ہوگا، انسے مونہ لگنا انکا رویہ اور پیشہ ہے، جو افسوس اور شرمناک ہے۔

کیوں کی یہ لوگ اپنی آنگن چوڑ، کسی غیر کی نجی زندگی میں داخل دیتے گین، اسلئے اس بکواس کو خاتمہ کرنے کیلئے انہیں یاہ یاد دلایا جاتا ہے، کی یہ پہلے اپنی اور گور کرن، دیاں دیں، کیوں کی ہمیشہ کسی اجنبی لوگ کے بارے میں عنب شناب بکنے سے پہلے، سبکو اونے گریبان میں جھانکے دیکھنا ضروری ہے۔

تبھی انسانیت اور تیزیب جھلکتا ہے۔

نا کی اپنے گھر کی گندگی اور نکس کو دیکھی اندیکھا اور انکار کرکے ، کسی انجسنے پر وار کرنا بمطلب بیوقوفی ہے۔

بھارت اور پاکستان دونوں دیش میں فلحال بہت عورت اور مرد جنکی عمر ۴۵ – ۶۰ کے قریب ہے، جنکی ابتک شادی ہونے کی کوئی نام اور نشان نہیں ہے۔

اسلئے ان داخل انداز دلالوں کو انکی شادی کروانی چاہیے، اگر دوسروں کی شادی کو لیکر انہیں اتنی فکرا ہے۔

اور ویسے بھی، یاہ کھلی راز ہے کی، شادی شدہ ایک اسی مذاق بن گیا ہے انکے سماج میں، جہاں نا شادی قائم ہے، نہیں وہ شادی شدہ ہے، جہاں اپنی دھن دولت کی نمائش کے لئے شادی رچایا جاتا ہے۔

اور پھر دہج سے لیکر اور کئی سماجک باتوں کو لیکر۔ شادی ٹوٹکر راستے الگ الگ ہو جاتے ہیں۔

یاہ حالات بھارت اور پاکستان میں حقیقت ہے جو لاکھ چھپانے سے بھی نہیں چھپتا، جیسے سچ اور موچ کو نہیں چھپایا جاتا۔

اسلئے ان ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی یاہ آخری بار کگیٹاونی ہے کی اپنے ٹیڈی مروڑی گھر سنبھالیں اور بیوزے ہمسائے موہ لگکر اپنی ناک نا کٹوالیں۔

رہا سوال ان کچڑ پٹی جا جو ایسی باتوں میں الجھتے ہیں، اور ایسی فضول باتوں کی جد ہیں۔ اپنی بیبی چوڑ عرصے ہوئے، اور و بھی بن اولاد جو اپنی چتا پر آگ دینے کے لئے بھی نہیں ہے۔ اسلئے اس حالات میں اپنی سوشیل میڈیا سے ہی کسی کو بھاڑے میں لین کی مجبوری ہے۔

انہیں کسی جے جوان بیٹے پر تیر مارنا اور طعنے دینا سیاسی یعنی راجنیتی گنڈا گردی ہے۔ جس کے لئے یہ بدنام ہے۔

اور اسکی مُتبیج انہیں توس جواب لینے کی عادت بنا لینا ضروری ہے۔

ایسے ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی حرکات – اپنے موہ خود کالا کرنا ہوتا ہے۔

باتمیزی ہد پر کرنے والے اپنے باتمیزی پر لگام دو، ورنہ موہ چھپانے کی جگہ نہیں ملےگی۔

پدمنی ارہنت

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