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मान न मान हम तेरे हैवान। (हिंदी) (اردو) – Hindi & Urdu

मान न मान हम तेरे हैवान।

पद्मिनी अरहन्त 

(Hindi & Urdu) 

मान न मान हम तेरे हैवान।

बेगानों की शादी में परदेसी दीवाने ।

यह संदेश उनकेलिए है।

जो दूसरों की निजी ज़िंदगी में टांग अड़ाना अपना पैदायिश हक समझते हैं।

ख़ासकर दूसरे के बेटे की ब्याह को लेकर ताने मारना, जब यह भेड़िए उस सिलसिले पर कई बार दख़ल अंदाज़ी करके, जान पूछकर समस्या खड़ा करने में कोई कसर नहीं रक्के।वो एक तरफ़,

और दूसरी बात – कोसों मील दूर बैटे किसी अनजान लोगों के बारे में जिनके सात, ना कोई नाता रिश्ता था, ना है, ना कभी होगा, उनसे मूँह लगना इनका रव्वैया और पेशा है, जो अफ़सोस और शर्मनाक है। 

क्योंकि ये लोग अपनी आँगन छोड़, किसी ग़ैर के निजी ज़िंदगी में दख़ल देते हैं, इसलिए इस बकवास को खत्म करने के लिए, इन्हें यह याद दिलाया जाता है, की ये पहले अपनी और गौर करें, ध्यान दे, क्यों की हमेशा किसी अजनबी लोग के बारे में अनाब शनाब बकने से पहले, सबको अपने ग़ैरेबान में झाँके देखना ज़रूरी है।

तभी इंसानियत और तहज़ीब झलकता है।  

ना की अपने घर की गंदगी और नुक्स को देखी अनदेखा और इंकार करके, किसी अनजाने पर वार करना बेमतलब बेवक़ूफ़ी है । 

भारत और पाक़िस्तान दोनों देश में फिलहाल बहुत औरत और मरद जिनकी उम्र ४५ – ६० के करीब है, जिनकी अबतक शादी होने की कोई नाम और निशान नहीं है।

इसलिए इन दख़ल अंदाज़ दलालों को उनकी शादी करवानी चाहिए, अगर दूसरों की शादी को लेकर इन्हें इतनी फ़िक्र है ।

और वैसे भी, यह खुली राज़ है की शादी शुदा एक हसी मज़ाक़ बन गया है इनके समाज में, जहाँ ना शादी क़ायम है, नाही वह शादी शुद्ध है, जहाँ अपने धन दौलत की नुमाईश के लिए शादी रचाया जाता है।

और फिर दहेज़ से लेकर और कई सामाजिक बातों को लेकर, शादी टूटकर रास्ते अलग अलग हो जाते है।

यह हालत भारत और पाकिस्तान में हकीकत है जो लाख चुपाने से भी नहीं चुपती, जैसे सच और मूच नहीं चिपाया जाता।

इसलिए इन मान न मान हम तेरे हैवान को यह आख़िरी बार चेतावनी है की अपने टेडे मरोड़े घर संभालें और बेवजय हमसे मूंह लगकर अपनी नाक न कटवालें। 

रहा सवाल उन कच्छड़ पट्टी का जो ऐसी बातों में उलझते है, और ऐसे फ़िज़ूल बातों की जड़ हैं। अपनी भीभी छोड़े अरसे हुए, और वो भी बिन औलाद जो अपनी चिता पर आग देने के लिए भी नहीं है। इसलिए इस हालत में अपनी सोशियल मीडिया से ही किसी को भाड़े में लाने की मजबूरी है।

उन्हें किसी के जवान बेटे पर तीर मारना और ताने देना सियासी यानी राजनीति गुंडा गर्दी है। जिसकिलिए ये बदनाम है । और उसके मुताबिक इन्हें टोस जवाब लेने की आदत बना लेना ज़रूरी है।

ऐसे मान न मान हम तेरे हैवान की हरकत – अपने मुँह ख़ुद काला करना होता है । 

बतमीज़ी हद पार करने वाले अपने बतमीज़ी पर लगाम दो, वरना मुँह चुपाने को जगह नहीं मिलेगी । 

पद्मिनी अरहन्त 

———————————————————————-

ماں نا ماں ہم تیرے حیوان

بیگانوں کی شادی میں پردیسی دیوانے

یاہ سندیش انکیلیے ہے

جو دوسروں کی نجی زندگی میں ٹانگ اڑانا اپنا پیدائش حق سمجھتے ہیں

خسکر دوسری کی بیٹے کی بیاہ کو لیکر طعنے مارما، جب یاہ بھیڑیے اس سلسلے پر کے بار داخل اندازی کرکے، جان پوچھکر سمسیا کھڑا کرنے میں کوئی کسر نہکن رکھے۔ وو ایک طرف،

اور دوسری بات – کوسوں مل دپور بیٹ کسی انجان لوگوں کے بارے میں جنکے سات، نا کو ناتا رشتہ تھا، نا ہے، نا کبھی ہوگا، انسے مونہ لگنا انکا رویہ اور پیشہ ہے، جو افسوس اور شرمناک ہے۔

کیوں کی یہ لوگ اپنی آنگن چوڑ، کسی غیر کی نجی زندگی میں داخل دیتے گین، اسلئے اس بکواس کو خاتمہ کرنے کیلئے انہیں یاہ یاد دلایا جاتا ہے، کی یہ پہلے اپنی اور گور کرن، دیاں دیں، کیوں کی ہمیشہ کسی اجنبی لوگ کے بارے میں عنب شناب بکنے سے پہلے، سبکو اونے گریبان میں جھانکے دیکھنا ضروری ہے۔

تبھی انسانیت اور تیزیب جھلکتا ہے۔

نا کی اپنے گھر کی گندگی اور نکس کو دیکھی اندیکھا اور انکار کرکے ، کسی انجسنے پر وار کرنا بمطلب بیوقوفی ہے۔

بھارت اور پاکستان دونوں دیش میں فلحال بہت عورت اور مرد جنکی عمر ۴۵ – ۶۰ کے قریب ہے، جنکی ابتک شادی ہونے کی کوئی نام اور نشان نہیں ہے۔

اسلئے ان داخل انداز دلالوں کو انکی شادی کروانی چاہیے، اگر دوسروں کی شادی کو لیکر انہیں اتنی فکرا ہے۔

اور ویسے بھی، یاہ کھلی راز ہے کی، شادی شدہ ایک اسی مذاق بن گیا ہے انکے سماج میں، جہاں نا شادی قائم ہے، نہیں وہ شادی شدہ ہے، جہاں اپنی دھن دولت کی نمائش کے لئے شادی رچایا جاتا ہے۔

اور پھر دہج سے لیکر اور کئی سماجک باتوں کو لیکر۔ شادی ٹوٹکر راستے الگ الگ ہو جاتے ہیں۔

یاہ حالات بھارت اور پاکستان میں حقیقت ہے جو لاکھ چھپانے سے بھی نہیں چھپتا، جیسے سچ اور موچ کو نہیں چھپایا جاتا۔

اسلئے ان ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی یاہ آخری بار کگیٹاونی ہے کی اپنے ٹیڈی مروڑی گھر سنبھالیں اور بیوزے ہمسائے موہ لگکر اپنی ناک نا کٹوالیں۔

رہا سوال ان کچڑ پٹی جا جو ایسی باتوں میں الجھتے ہیں، اور ایسی فضول باتوں کی جد ہیں۔ اپنی بیبی چوڑ عرصے ہوئے، اور و بھی بن اولاد جو اپنی چتا پر آگ دینے کے لئے بھی نہیں ہے۔ اسلئے اس حالات میں اپنی سوشیل میڈیا سے ہی کسی کو بھاڑے میں لین کی مجبوری ہے۔

انہیں کسی جے جوان بیٹے پر تیر مارنا اور طعنے دینا سیاسی یعنی راجنیتی گنڈا گردی ہے۔ جس کے لئے یہ بدنام ہے۔

اور اسکی مُتبیج انہیں توس جواب لینے کی عادت بنا لینا ضروری ہے۔

ایسے ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی حرکات – اپنے موہ خود کالا کرنا ہوتا ہے۔

باتمیزی ہد پر کرنے والے اپنے باتمیزی پر لگام دو، ورنہ موہ چھپانے کی جگہ نہیں ملےگی۔

پدمنی ارہنت

Politics

मान न मान हम तेरे हैवान। (हिंदी) (اردو) – Hindi & Urdu

मान न मान हम तेरे हैवान।

पद्मिनी अरहन्त 

(Hindi & Urdu) 

मान न मान हम तेरे हैवान।

बेगानों की शादी में परदेसी दीवाने ।

यह संदेश उनकेलिए है।

जो दूसरों की निजी ज़िंदगी में टांग अड़ाना अपना पैदायिश हक समझते हैं।

ख़ासकर दूसरे के बेटे की ब्याह को लेकर ताने मारना, जब यह भेड़िए उस सिलसिले पर कई बार दख़ल अंदाज़ी करके, जान पूछकर समस्या खड़ा करने में कोई कसर नहीं रक्के।वो एक तरफ़,

और दूसरी बात – कोसों मील दूर बैटे किसी अनजान लोगों के बारे में जिनके सात, ना कोई नाता रिश्ता था, ना है, ना कभी होगा, उनसे मूँह लगना इनका रव्वैया और पेशा है, जो अफ़सोस और शर्मनाक है। 

क्योंकि ये लोग अपनी आँगन छोड़, किसी ग़ैर के निजी ज़िंदगी में दख़ल देते हैं, इसलिए इस बकवास को खत्म करने के लिए, इन्हें यह याद दिलाया जाता है, की ये पहले अपनी और गौर करें, ध्यान दे, क्यों की हमेशा किसी अजनबी लोग के बारे में अनाब शनाब बकने से पहले, सबको अपने ग़ैरेबान में झाँके देखना ज़रूरी है।

तभी इंसानियत और तहज़ीब झलकता है।  

ना की अपने घर की गंदगी और नुक्स को देखी अनदेखा और इंकार करके, किसी अनजाने पर वार करना बेमतलब बेवक़ूफ़ी है । 

भारत और पाक़िस्तान दोनों देश में फिलहाल बहुत औरत और मरद जिनकी उम्र ४५ – ६० के करीब है, जिनकी अबतक शादी होने की कोई नाम और निशान नहीं है।

इसलिए इन दख़ल अंदाज़ दलालों को उनकी शादी करवानी चाहिए, अगर दूसरों की शादी को लेकर इन्हें इतनी फ़िक्र है ।

और वैसे भी, यह खुली राज़ है की शादी शुदा एक हसी मज़ाक़ बन गया है इनके समाज में, जहाँ ना शादी क़ायम है, नाही वह शादी शुद्ध है, जहाँ अपने धन दौलत की नुमाईश के लिए शादी रचाया जाता है।

और फिर दहेज़ से लेकर और कई सामाजिक बातों को लेकर, शादी टूटकर रास्ते अलग अलग हो जाते है।

यह हालत भारत और पाकिस्तान में हकीकत है जो लाख चुपाने से भी नहीं चुपती, जैसे सच और मूच नहीं चिपाया जाता।

इसलिए इन मान न मान हम तेरे हैवान को यह आख़िरी बार चेतावनी है की अपने टेडे मरोड़े घर संभालें और बेवजय हमसे मूंह लगकर अपनी नाक न कटवालें। 

रहा सवाल उन कच्छड़ पट्टी का जो ऐसी बातों में उलझते है, और ऐसे फ़िज़ूल बातों की जड़ हैं। अपनी भीभी छोड़े अरसे हुए, और वो भी बिन औलाद जो अपनी चिता पर आग देने के लिए भी नहीं है। इसलिए इस हालत में अपनी सोशियल मीडिया से ही किसी को भाड़े में लाने की मजबूरी है।

उन्हें किसी के जवान बेटे पर तीर मारना और ताने देना सियासी यानी राजनीति गुंडा गर्दी है। जिसकिलिए ये बदनाम है । और उसके मुताबिक इन्हें टोस जवाब लेने की आदत बना लेना ज़रूरी है।

ऐसे मान न मान हम तेरे हैवान की हरकत – अपने मुँह ख़ुद काला करना होता है । 

बतमीज़ी हद पार करने वाले अपने बतमीज़ी पर लगाम दो, वरना मुँह चुपाने को जगह नहीं मिलेगी । 

पद्मिनी अरहन्त 

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ماں نا ماں ہم تیرے حیوان

بیگانوں کی شادی میں پردیسی دیوانے

یاہ سندیش انکیلیے ہے

جو دوسروں کی نجی زندگی میں ٹانگ اڑانا اپنا پیدائش حق سمجھتے ہیں

خسکر دوسری کی بیٹے کی بیاہ کو لیکر طعنے مارما، جب یاہ بھیڑیے اس سلسلے پر کے بار داخل اندازی کرکے، جان پوچھکر سمسیا کھڑا کرنے میں کوئی کسر نہکن رکھے۔ وو ایک طرف،

اور دوسری بات – کوسوں مل دپور بیٹ کسی انجان لوگوں کے بارے میں جنکے سات، نا کو ناتا رشتہ تھا، نا ہے، نا کبھی ہوگا، انسے مونہ لگنا انکا رویہ اور پیشہ ہے، جو افسوس اور شرمناک ہے۔

کیوں کی یہ لوگ اپنی آنگن چوڑ، کسی غیر کی نجی زندگی میں داخل دیتے گین، اسلئے اس بکواس کو خاتمہ کرنے کیلئے انہیں یاہ یاد دلایا جاتا ہے، کی یہ پہلے اپنی اور گور کرن، دیاں دیں، کیوں کی ہمیشہ کسی اجنبی لوگ کے بارے میں عنب شناب بکنے سے پہلے، سبکو اونے گریبان میں جھانکے دیکھنا ضروری ہے۔

تبھی انسانیت اور تیزیب جھلکتا ہے۔

نا کی اپنے گھر کی گندگی اور نکس کو دیکھی اندیکھا اور انکار کرکے ، کسی انجسنے پر وار کرنا بمطلب بیوقوفی ہے۔

بھارت اور پاکستان دونوں دیش میں فلحال بہت عورت اور مرد جنکی عمر ۴۵ – ۶۰ کے قریب ہے، جنکی ابتک شادی ہونے کی کوئی نام اور نشان نہیں ہے۔

اسلئے ان داخل انداز دلالوں کو انکی شادی کروانی چاہیے، اگر دوسروں کی شادی کو لیکر انہیں اتنی فکرا ہے۔

اور ویسے بھی، یاہ کھلی راز ہے کی، شادی شدہ ایک اسی مذاق بن گیا ہے انکے سماج میں، جہاں نا شادی قائم ہے، نہیں وہ شادی شدہ ہے، جہاں اپنی دھن دولت کی نمائش کے لئے شادی رچایا جاتا ہے۔

اور پھر دہج سے لیکر اور کئی سماجک باتوں کو لیکر۔ شادی ٹوٹکر راستے الگ الگ ہو جاتے ہیں۔

یاہ حالات بھارت اور پاکستان میں حقیقت ہے جو لاکھ چھپانے سے بھی نہیں چھپتا، جیسے سچ اور موچ کو نہیں چھپایا جاتا۔

اسلئے ان ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی یاہ آخری بار کگیٹاونی ہے کی اپنے ٹیڈی مروڑی گھر سنبھالیں اور بیوزے ہمسائے موہ لگکر اپنی ناک نا کٹوالیں۔

رہا سوال ان کچڑ پٹی جا جو ایسی باتوں میں الجھتے ہیں، اور ایسی فضول باتوں کی جد ہیں۔ اپنی بیبی چوڑ عرصے ہوئے، اور و بھی بن اولاد جو اپنی چتا پر آگ دینے کے لئے بھی نہیں ہے۔ اسلئے اس حالات میں اپنی سوشیل میڈیا سے ہی کسی کو بھاڑے میں لین کی مجبوری ہے۔

انہیں کسی جے جوان بیٹے پر تیر مارنا اور طعنے دینا سیاسی یعنی راجنیتی گنڈا گردی ہے۔ جس کے لئے یہ بدنام ہے۔

اور اسکی مُتبیج انہیں توس جواب لینے کی عادت بنا لینا ضروری ہے۔

ایسے ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی حرکات – اپنے موہ خود کالا کرنا ہوتا ہے۔

باتمیزی ہد پر کرنے والے اپنے باتمیزی پر لگام دو، ورنہ موہ چھپانے کی جگہ نہیں ملےگی۔

پدمنی ارہنت

Health

मान न मान हम तेरे हैवान। (हिंदी) (اردو) – Hindi & Urdu

मान न मान हम तेरे हैवान।

पद्मिनी अरहन्त 

(Hindi & Urdu) 

मान न मान हम तेरे हैवान।

बेगानों की शादी में परदेसी दीवाने ।

यह संदेश उनकेलिए है।

जो दूसरों की निजी ज़िंदगी में टांग अड़ाना अपना पैदायिश हक समझते हैं।

ख़ासकर दूसरे के बेटे की ब्याह को लेकर ताने मारना, जब यह भेड़िए उस सिलसिले पर कई बार दख़ल अंदाज़ी करके, जान पूछकर समस्या खड़ा करने में कोई कसर नहीं रक्के।वो एक तरफ़,

और दूसरी बात – कोसों मील दूर बैटे किसी अनजान लोगों के बारे में जिनके सात, ना कोई नाता रिश्ता था, ना है, ना कभी होगा, उनसे मूँह लगना इनका रव्वैया और पेशा है, जो अफ़सोस और शर्मनाक है। 

क्योंकि ये लोग अपनी आँगन छोड़, किसी ग़ैर के निजी ज़िंदगी में दख़ल देते हैं, इसलिए इस बकवास को खत्म करने के लिए, इन्हें यह याद दिलाया जाता है, की ये पहले अपनी और गौर करें, ध्यान दे, क्यों की हमेशा किसी अजनबी लोग के बारे में अनाब शनाब बकने से पहले, सबको अपने ग़ैरेबान में झाँके देखना ज़रूरी है।

तभी इंसानियत और तहज़ीब झलकता है।  

ना की अपने घर की गंदगी और नुक्स को देखी अनदेखा और इंकार करके, किसी अनजाने पर वार करना बेमतलब बेवक़ूफ़ी है । 

भारत और पाक़िस्तान दोनों देश में फिलहाल बहुत औरत और मरद जिनकी उम्र ४५ – ६० के करीब है, जिनकी अबतक शादी होने की कोई नाम और निशान नहीं है।

इसलिए इन दख़ल अंदाज़ दलालों को उनकी शादी करवानी चाहिए, अगर दूसरों की शादी को लेकर इन्हें इतनी फ़िक्र है ।

और वैसे भी, यह खुली राज़ है की शादी शुदा एक हसी मज़ाक़ बन गया है इनके समाज में, जहाँ ना शादी क़ायम है, नाही वह शादी शुद्ध है, जहाँ अपने धन दौलत की नुमाईश के लिए शादी रचाया जाता है।

और फिर दहेज़ से लेकर और कई सामाजिक बातों को लेकर, शादी टूटकर रास्ते अलग अलग हो जाते है।

यह हालत भारत और पाकिस्तान में हकीकत है जो लाख चुपाने से भी नहीं चुपती, जैसे सच और मूच नहीं चिपाया जाता।

इसलिए इन मान न मान हम तेरे हैवान को यह आख़िरी बार चेतावनी है की अपने टेडे मरोड़े घर संभालें और बेवजय हमसे मूंह लगकर अपनी नाक न कटवालें। 

रहा सवाल उन कच्छड़ पट्टी का जो ऐसी बातों में उलझते है, और ऐसे फ़िज़ूल बातों की जड़ हैं। अपनी भीभी छोड़े अरसे हुए, और वो भी बिन औलाद जो अपनी चिता पर आग देने के लिए भी नहीं है। इसलिए इस हालत में अपनी सोशियल मीडिया से ही किसी को भाड़े में लाने की मजबूरी है।

उन्हें किसी के जवान बेटे पर तीर मारना और ताने देना सियासी यानी राजनीति गुंडा गर्दी है। जिसकिलिए ये बदनाम है । और उसके मुताबिक इन्हें टोस जवाब लेने की आदत बना लेना ज़रूरी है।

ऐसे मान न मान हम तेरे हैवान की हरकत – अपने मुँह ख़ुद काला करना होता है । 

बतमीज़ी हद पार करने वाले अपने बतमीज़ी पर लगाम दो, वरना मुँह चुपाने को जगह नहीं मिलेगी । 

पद्मिनी अरहन्त 

———————————————————————-

ماں نا ماں ہم تیرے حیوان

بیگانوں کی شادی میں پردیسی دیوانے

یاہ سندیش انکیلیے ہے

جو دوسروں کی نجی زندگی میں ٹانگ اڑانا اپنا پیدائش حق سمجھتے ہیں

خسکر دوسری کی بیٹے کی بیاہ کو لیکر طعنے مارما، جب یاہ بھیڑیے اس سلسلے پر کے بار داخل اندازی کرکے، جان پوچھکر سمسیا کھڑا کرنے میں کوئی کسر نہکن رکھے۔ وو ایک طرف،

اور دوسری بات – کوسوں مل دپور بیٹ کسی انجان لوگوں کے بارے میں جنکے سات، نا کو ناتا رشتہ تھا، نا ہے، نا کبھی ہوگا، انسے مونہ لگنا انکا رویہ اور پیشہ ہے، جو افسوس اور شرمناک ہے۔

کیوں کی یہ لوگ اپنی آنگن چوڑ، کسی غیر کی نجی زندگی میں داخل دیتے گین، اسلئے اس بکواس کو خاتمہ کرنے کیلئے انہیں یاہ یاد دلایا جاتا ہے، کی یہ پہلے اپنی اور گور کرن، دیاں دیں، کیوں کی ہمیشہ کسی اجنبی لوگ کے بارے میں عنب شناب بکنے سے پہلے، سبکو اونے گریبان میں جھانکے دیکھنا ضروری ہے۔

تبھی انسانیت اور تیزیب جھلکتا ہے۔

نا کی اپنے گھر کی گندگی اور نکس کو دیکھی اندیکھا اور انکار کرکے ، کسی انجسنے پر وار کرنا بمطلب بیوقوفی ہے۔

بھارت اور پاکستان دونوں دیش میں فلحال بہت عورت اور مرد جنکی عمر ۴۵ – ۶۰ کے قریب ہے، جنکی ابتک شادی ہونے کی کوئی نام اور نشان نہیں ہے۔

اسلئے ان داخل انداز دلالوں کو انکی شادی کروانی چاہیے، اگر دوسروں کی شادی کو لیکر انہیں اتنی فکرا ہے۔

اور ویسے بھی، یاہ کھلی راز ہے کی، شادی شدہ ایک اسی مذاق بن گیا ہے انکے سماج میں، جہاں نا شادی قائم ہے، نہیں وہ شادی شدہ ہے، جہاں اپنی دھن دولت کی نمائش کے لئے شادی رچایا جاتا ہے۔

اور پھر دہج سے لیکر اور کئی سماجک باتوں کو لیکر۔ شادی ٹوٹکر راستے الگ الگ ہو جاتے ہیں۔

یاہ حالات بھارت اور پاکستان میں حقیقت ہے جو لاکھ چھپانے سے بھی نہیں چھپتا، جیسے سچ اور موچ کو نہیں چھپایا جاتا۔

اسلئے ان ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی یاہ آخری بار کگیٹاونی ہے کی اپنے ٹیڈی مروڑی گھر سنبھالیں اور بیوزے ہمسائے موہ لگکر اپنی ناک نا کٹوالیں۔

رہا سوال ان کچڑ پٹی جا جو ایسی باتوں میں الجھتے ہیں، اور ایسی فضول باتوں کی جد ہیں۔ اپنی بیبی چوڑ عرصے ہوئے، اور و بھی بن اولاد جو اپنی چتا پر آگ دینے کے لئے بھی نہیں ہے۔ اسلئے اس حالات میں اپنی سوشیل میڈیا سے ہی کسی کو بھاڑے میں لین کی مجبوری ہے۔

انہیں کسی جے جوان بیٹے پر تیر مارنا اور طعنے دینا سیاسی یعنی راجنیتی گنڈا گردی ہے۔ جس کے لئے یہ بدنام ہے۔

اور اسکی مُتبیج انہیں توس جواب لینے کی عادت بنا لینا ضروری ہے۔

ایسے ماں نا ماں ہم تیرے حیوان کی حرکات – اپنے موہ خود کالا کرنا ہوتا ہے۔

باتمیزی ہد پر کرنے والے اپنے باتمیزی پر لگام دو، ورنہ موہ چھپانے کی جگہ نہیں ملےگی۔

پدمنی ارہنت

Humanitarian Issues

Pakistan – Islamabad Terror Blast

Pakistan

Islamabad Terror Blast

Padmini Arhant

Terrorism flares not from nowhere, in fact manufactured and unleashed by those on extended term in office offshore whose sole purpose of existence is creating chaos, deaths and destruction to avenge revenge for debacles experienced by them on own invite and insinuations.

The signature trait of terrorism arise from aiding, abetting, appointing and acquiescing terror with malicious involvement to harm innocent lives and upend normal governance wherever possible.

The latest suicide bomb blast in Shia mosque in Islamabad is related to sectarian divide strategy that is long practiced by terror politics, to cause pain and suffering with the focus on derailing political stability for own and selective hegemonic interests and dominance.

The foreign sources having adopted nefarious unscrupulous means to grab the mantle of power seasoned at young age in violence and murders in homicide escalated into genocide and mass killings upon seizing authority are the existential threat to humanity at large.

Unfortunately, terror politics rein control over system on the brink of collapse for the stated reason with survival premised on bloodshed, massacre of innocent citizens and cross border terrorism.

Terror also unfolds in political minds due to internal fragmentation and turbulence from within unable to deal with own reflection reminding them of the horror they are to them and others near and far.

Terrorizing innocent lives going about living their normal life is harbinger of end of the origin and catalysts engaged in terrorism.

Above all, terror feeds on egotistic power mongering preying on opportunities to perpetrate violence and activate unrest.

The predator terror has problems with peace, joy and harmony. There is zero tolerance to other’s basic rights to live and share life in happiness. That attracts terror attention and indulgence for discord and tragedy.

When there is festive activities such as in Lahore, Punjab, the arrival of Spring festival with kite flying and celebrations among community, the sight was not tolerated by terror leading to cancellation in the wake of the terror event.

Terrorism is the root of evil that eventually consumes the ones spreading in the self-destructive mortifying existence without redemption. The guilt ridden sinful life is terror self- inflicted wound never healing nor heeding calls to refrain and renounce the dreadful act.

At the end, sadness and turmoil served returns to terror in accordance with reaping what one sows for others in life.

Sincere condolences to families and victims mourning the loss of their loved ones in the terror blast in Islamabad, with prayers to provide strength and solace to the grieving survivors in the condemnable terror.

Padmini Arhant

اردو

جب دوسروں کی کشی برداش نہیں ہوتی تب کُدھکُشی شامل ہوتی ہے۔ دہشد گردی ایسے وقت پر جنون بنتا ہے۔

دہشد گردی کوڑھ کی تباہی کا اعلان بھی کرتا ہے۔

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हिन्दी

जब दूसरों की खुशी बर्दाश नहीं होती, वह खुदख़ुशी करते हैं और आतंग उनका जुनून बनता है ।

आतंग अपने ही अंत घोषित करता है।

Jab doosron ki khushi bardash nahin hoti, tab voh khudkhushi karte hain, aur aatang (terror) unka junoon banta hai.

Aatang apnè hi anth (end) ghoshith karta hai.

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When other’s happiness is not tolerated, suicidal terror becomes the frenzy in the disturbed mind.

Terror is the harbinger of self-termination.

Padmini Arhant

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